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निवेदन - कोटासिटी.कोम
हम प्रयास कर रहे हैं कि क्षैत्रिय साहित्यकारों एवं कवियों कि कृतियां इंटरनेट के माध्यम पर उपलब्ध हौं । इस कार्य में आपका सहयोग अपेक्षित है ।
श्रंखला का प्रारंम्भ कर रहे हें, मॉगरोल में जन्मे श्री नाथूलाल महावर 'मधुरम' की रचना से, जिनका परिचय निम्नलिखित हे -

Shri Nathulal Mahavar















श्री नाथूलाल महावर 'मधुरम'

जन्म - 3 जुलाई 1937, ग्राम मॉगरोल, जिला बारॉ (राजस्थान)
शिक्षा - एम.ए. हिन्दी साहित्य
प्रकाशित कृति -
1. मन वृन्दावन (हिन्दी - काव्य कृति)
2. श्रुतिसुधा (ऋग्वेदोक्त उषासूक्त का काव्यानुवाद)
3. काव्य कानन (ब्रजभाषा - काव्य कृति)
4. माटी म्हारा देस की (राजस्थानी - काव्य कृति)
5. राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी द्वारा मोनोग्राफ प्रकाशित
प्रकाशन प्रतीक्षा में -
1. तुलसी चरित सुधा (प्रबंध काव्य - ब्रजभाषा)
2. राम कवन प्रभु (काव्य कृति)
3. मीरां (काव्य कृति)
4. रास रस रंगिनी (रास पंचाध्यायी का कव्यानुवाद)
5. उदबोधन शतक त्रय
6. गुरू ज्ञान शतक
7. कालिन्दी शतक (ब्रजभाषा काव्य)
8. वेणु शतक द्वय (काव्य कृति)
9. हाड़ौति हिय-हार (राजस्थानी काव्य)
10. मन-मधुवन (काव्य कृति)
सम्मान एवं पुरस्कार
- राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी द्वारा - महान कवि सोमनाथ काव्य पुरस्कार एवं सम्मान
- जय साहित्य संसद जयपुर द्वारा - गुरु कमलाकर काव्य पुरस्कार
- साहित्य मंडल श्री नाथद्वारा - ब्रजभाषा विभुषण उपाधि से सम्मानित
- हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा - 'वाग्विदांवर' उपाधि से सम्मानित
- पं. दीनदयाल उपाध्याय मंच रामगढ़ शेखावाटी द्वारा - उत्कृष्ठ साहित्यकार सम्मान एवं पुरस्कार
- श्री द्वारका सेवा निधी ट्रस्ट जयपुर द्वारा -श्रीमती मन्नी देवी काव्य पुरस्कार
- काव्यालोक संस्था जयपुर द्वारा - 'मानस मराल' उपाधि से सम्मानित
- देवीधाम, एम्स्टरडेम, हालैण्ड द्वारा - मिलेनियम इंटरनेशनल हिन्दू अवार्ड - (डाक से प्राप्त)
विशेष
- विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी, राजस्थानी एवं ब्रजभाषा कविताऍ प्रकाशित ।
- आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से कविताऍ प्रसारित ।
- कई मंचों से काव्य पाठ ।
- वैदिक संस्कृति और वेदों के सूक्तों के भावानुवाद में विशेष रुचि ।
संप्रति
- सेवा निवृत्त, उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग, राजस्थान
- निरंतर अध्ययन व लेखन
पता
कृष्णायन, 124 मुक्तानन्द नगर,
गोपालपुरा बाईपास,
जयपुर - 302018
फोन - 254519

राजरानी बिटिया

सुख सपन सुहानी राजरानी बिटिया ।
घर-मंदिर की मूरत सुहानी बिटिया ॥

बेटी ऊषा सी सुशीतल स्वभाववारी है ।
दुःख अँधियारी निशा कूं किरण न्यारी है ॥
पितु मातु पत राखे सुखसानी बिटिया,
घर-मंदिर की मुरत सुहानी बिटिया ॥

धरती माता सी गम्भीर धीर छॉड़ति नही;
दुःख सहे पर मुख से उचारति नहीं ।
कुल-कानि की है अमिट निशानी बिटिया,
घर-मंदिर की मुरत सुहानी बिटिया ॥

नहीं भाग्य का पता है कौन घर जावेगी,
मिले कंस या किशन उफ नहीं लावेगी ॥
कौन माटी की बनी है महारानी
बिटिया ,
घर-मंदिर की मुरत सुहानी बिटिया ॥

जहँ देवे दान डोली बैठ चली जावेगी,
पीहर सासरिये की कुल-कानि मन भावेगी
सुख-दुःख में समान सी सयानी बिटिया,
घर-मंदिर की मुरत सुहानी बिटिया ॥

सखि संग तो सुरंगिनी कुरंगिनी सी है,
बन बाग बगियान की विहंगिनी सी है ।
इस दिन उड़ जावे है बिरानी बिटिया,
घर-मंदिर की मुरत सुहानी बिटिया ॥
 

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